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मारे इर्द-गिर्द लाखों घटनाएँ रोज घटती हैं और अगर हम उनको किसी के साथ न बांटें तो ये हमारे अंदर घुटन पैदा करती हैं ,आज मैनें यह सोचा की
क्यों न अपने अंदर पैदा होने बाली इस घुटन को
बाहर निकालूं और कुछ लिखूं ताकि आने बाला कल ये जान सके की सच क्या है ................

शनिवार, 15 अगस्त 2015

सच की तरफ मेरा पहला कदम.................: आजादी का रंग जरा फीका सा लगता है..................

सच की तरफ मेरा पहला कदम.................: आजादी का रंग जरा फीका सा लगता है..................

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