All Rights are Reserved


मारे इर्द-गिर्द लाखों घटनाएँ रोज घटती हैं और अगर हम उनको किसी के साथ न बांटें तो ये हमारे अंदर घुटन पैदा करती हैं ,आज मैनें यह सोचा की
क्यों न अपने अंदर पैदा होने बाली इस घुटन को
बाहर निकालूं और कुछ लिखूं ताकि आने बाला कल ये जान सके की सच क्या है ................

रविवार, 26 अप्रैल 2015

खुदा भी अजीब मजाक कर रहा है......................

खुदा भी अजीब मजाक कर रहा है ,
   बनाकर बर्फ की ऊँची इमारतें  ,
   खुद ही उन्हें गिरा रहा है ,
जख्मों का कोई हिसाब नहीं,
खामोश चेहरों में अब जान नहीं,
    एक अलग सा रंग हो गया है मिटटी का भी अब तो,
    शमशान सा हो गया है शहर मेरा भी अब तो,
भटक रहे है लोग अपनों की तलाश में,
हर चेहरे की मिटटी को बार- बार बदल रहे हैं,
    दर्द से लिपटे रिश्ते चीख-चीख कर पूछ रहे हैं,
    क्या गुनाह किया था खुदा से ये सवाल कर रहे हैं,


प्रदीप सिंह

गांव –औच ,डाकघर –लाह्डू, तहसील – जयसिंह पुर, जिला – काँगड़ा , हिमाचल प्रदेश : 8894155669
Email: rana.pradeep83@gmail.com

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें