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हमारे इर्द-गिर्द लाखों घटनाएँ रोज घटती हैं और अगर हम उनको किसी के साथ न बांटें तो ये हमारे अंदर घुटन पैदा करती हैं ,आज मैनें यह सोचा की
क्यों न अपने अंदर पैदा होने बाली इस घुटन को बाहर निकालूं और कुछ लिखूं ताकि आने बाला कल ये जान सके की सच क्या है ................
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015
बस एक तुम सच्चे और किसान झूठा ............
जग झूठा , रब रूठा , सपने टूटे, साथ छुटा,
चली आंधी, दर्द उठा, फसल बर्बाद, परिबार भूखा,
आँखें पत्थर, विश्बास टूटा, मौसम बदला, किसान रूठा ,
झूठी कसमें, होंसला टूटा, लटका बदन, दर्द घटा ,
शर्म करो खुद को नेता कहने बालो,
तुम सच्चे और किसान झूठा, जुवान मिट्ठी और ज़हर तीखा,
बस एक तुम सच्चे और किसान झूठा ..............
प्रदीप सिंह
गांव –औच ,डाकघर –लाह्डू, तहसील – जयसिंह पुर, जिला – काँगड़ा , हिमाचल प्रदेश
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