समंदर के किनारे रेत पर हर रोज नजाने कितने ही ख्वाब जन्म लेते है और पलक झपकते ही एक लहर के साथ समंदर में समा जाते है,
भले ही ख्वाब सच नहीं होते, मगर जब तक समंदर की लहर रेत पर बने सपनों को बिखेर नहीं देती तबतक आदमी सब कुछ भुलाकर सपनों के साथ जी लेता है ...............
जिंदगी भी सपनों से भरा हुआ सफर है कुछ सपने टूटते है तो कुछ पुरे होते है, कुछ लोग टूटे सपनों को जोड़ने के सहारे जिंदगी जीते है, तो कुछ सपने टूटने से जिंदगी से रूठ जाते है, यहाँ तक हम अपनी अंतिम सांस तक सपने देखते है ......................
मुझे इस बात पर कुछ पंक्तियाँ याद आ रही हैं.....................
“कि इक ख्वाहिश है मेरी की हर रात तू मेरे सपनों में आये, कम से कम हर दिन रात होने के इन्तजार में तो गुजर जाये”
प्रदीप सिंह राणा
गांव –औच ,डाकघर –लाह्डू, तहसील – जयसिंह पुर, जिला – काँगड़ा , हिमाचल प्रदेश
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