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मारे इर्द-गिर्द लाखों घटनाएँ रोज घटती हैं और अगर हम उनको किसी के साथ न बांटें तो ये हमारे अंदर घुटन पैदा करती हैं ,आज मैनें यह सोचा की
क्यों न अपने अंदर पैदा होने बाली इस घुटन को
बाहर निकालूं और कुछ लिखूं ताकि आने बाला कल ये जान सके की सच क्या है ................

मंगलवार, 29 अप्रैल 2014

गरीबों का शहर बना दिया है भारत ............................................

गरीबों का शहर बना दिया है भारत ............................................
गरीब – गरीब करके ,सारा  देश गरीब कर दिया,
एक था सहारा जमीन का,  वो भी हमसे छीन लिया ,
दिखाकर सपने हसीं रोजगार के,  हर तरफ धुआं -धुआं कर दिया,
स्वास्थ्य सुबिधाओं के नाम पर,  सारा खून हमारा चूस लिया,
लटका है जिस्म चौराहे पर मेरा,  सारा बीज नकली दिया,
बचा था जो  ख्वाब सीने में मेरे,  उसमें भी खंज़र उतार दिया,
बस इक सहारा था जीने का,  वो भी मुझसे छीन लिया,
                                                    
                           प्रदीप सिंह (Social Engineer) Kangra Himachal Pradesh
                                                        Contact :  8894155669

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