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मारे इर्द-गिर्द लाखों घटनाएँ रोज घटती हैं और अगर हम उनको किसी के साथ न बांटें तो ये हमारे अंदर घुटन पैदा करती हैं ,आज मैनें यह सोचा की
क्यों न अपने अंदर पैदा होने बाली इस घुटन को
बाहर निकालूं और कुछ लिखूं ताकि आने बाला कल ये जान सके की सच क्या है ................

शनिवार, 1 अप्रैल 2023

हिन्दी शायरी

महोब्बत कोई मुकाम नहीं जिसे हासिल कर लिया जाए 
यह तो बस एक एहसास हैं जिसे महसूस कर लिया जाए

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जब मुकदर लकीरें खींचता  हैं न तो तक़दीरे  बदल देता हैं
अमीर को फ़कीर और फ़कीर को अमीर कर देता हैं

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दर्द की देहलीज पर खुशी  का दिया जलाना इतना आसान नहीं होता
वक़्त लगता हैं तस्वीरों पर धूल जमने में किसी को भूलाना इतना आसान नहीं होता

       @Pradeep Singh Rana



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